तिरूपति मंदिर भारत का सबसे ज्यादा अमीर मंदिर है । पूरे विश्व के धनी मंदिरो मे भी इसकी गिनती होती है । विश्व में जितने भी धर्मो के धार्मिक स्थान है जैसे कि मुसलमानो के लिये मक्का मदीना , ईसाइयो के लिये वेटिकन और यहूदियो के लिये येरूशलम आदि सभी स्थानो की तुलना में यहां पर हर साल ज्यादा श्रद्धालु आते हैं ।
तिरूपति मंदिर भारत का सबसे ज्यादा अमीर मंदिर है । पूरे विश्व के धनी मंदिरो मे भी इसकी गिनती होती है ।
विश्व में जितने भी धर्मो के धार्मिक स्थान है जैसे कि मुसलमानो के लिये मक्का मदीना , ईसाइयो के लिये वेटिकन और यहूदियो के लिये येरूशलम आदि सभी स्थानो की तुलना में यहां पर हर साल ज्यादा श्रद्धालु आते हैं । इस मंदिर को देखने की तमन्ना में ही हमने अपने प्रोग्राम में इस तरह बदलाव किया था कि हम हैदराबाद से तिरूपति जायेंगे । रात को हैदराबाद के स्टेशन से ट्रेन पकडी और खाना वगैरा खाकर सो गये । दिन में कहीं और बिरयानी ना मिलने की वजह से रात को ट्रेन में बिरयानी खायी थी । सुबह तिरूपति स्टेशन पर गाडी रूकी तो काफी भीड भाड थी । तिरूपति पहुंचने से पहले ही पहाडियां दिखनी शुरू हो गयी थी । तिरूपति बालाजी में स्टेशन से उतरकर हम सब एक जगह पर अपना सामान रखकर खडे हो गये । अंजान जगह , अंजान बोली एक या दो आदमी हो तो अलग बात होती है और ज्यादा आदमी हों तो अलग । महिलाओ के साथ मनीराम और लालाजी को छोडकर मै और मा0 जी चल दिये रूकने के लिये होटल देखने । रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर चलकर ही मेन चौक है यहां का । मंदिर उपर पहाडी पर है यहां तो केवल धर्मशालाऐ , लाज और मार्किट आदि ही हैं ।नीचे के मैप में देख सकते हैं आप तिरूपति बालाजी जाने का रास्ता Tirupati balaji jane ka rasta
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हैदराबाद से तिरूपति का मैप |
कई जगह होटल देखे पर ज्यादातर कई मंजिल उपर का कमरा दे रहे थे जो कि हमारे साथ के दो बुजुर्ग और एक लालाजी जो कि शरीर से भारी थे लेना पसंद नही करते थे वैसे अगर मजबूरी दिखायी देती थी तो मै अपना कमरा सबसे उपर का ले लेता था ताकि उन सबको दिक्कत ना हो क्योंकि इसमें हमें कोई दिक्कत नही होती थी । यहां भी ऐसा ही हुआ और दूसरी मंजिल पर तो तीन कमरे मिल गये पर एक कमरा चौथी मंजिल पर था । सही रेट में मिल रहा था इसलिये वे ही फाइनल कर दिये । कमरा 300 रू में एक था और वो 24 घंटे के लिये था । हमारा आज रात का यहीं रूकने का कार्यक्रम था और कल हमें चेन्नई पहुंचना था । अगले दिन यानि कल चेन्नई एगमोर स्टेशन से हमारी गाडी थी
कमरे में सामान रखकर हम सब नहाये धोये । धोये इसलिये क्योंकि ट्रेन में दो सफर हो चुके थे और इन तीन चार दिन में कोई कपडा धोया नही गया था तो यहां पर सबसे पहले ये काम निपटाया गया और उसके बाद मै नीचे होटल के रिसेप्शन से मंदिर के दर्शन आदि के बारे में थोडा बहुत जानकारी लेकर आया । नहाने आदि के कार्यक्रम में लगभग 11 बज गये थे और होटल वाले के मुताबिक अब तो आपको दर्शन कल तक भी नही हो पाने थे क्योंकि लोग सुबह सवेरे उतरते ही सबसे पहले दर्शनो की लाइन में लग जाते हैं । खैर हमने उसके बाद भी पहले नाश्ता और चाय अपने कमरो में मंगा ली थी आते ही और फिर चलने से पहले खाना खाने की सोची । खाना खाने के लिये यहां पर कोई दिक्कत नही है । शाकाहारी लोगो के लिये काफी विकल्प हैं और थाली सिस्टम ज्यादातर जगह है । खाना खाने के बाद हमने यहीं से मिलने वाली बस पकडी जो कि उपर मंदिर तक लेकर जाती है । मंदिर तक जाने का रास्ता बढिया बनाया गया है । वैसे यहीं से पहाडियों में को पैदल जाने का रास्ता भी है जिसे काफी लोग इस्तेमाल करते हैं ।
उपर पहाडी पर पहुंचकर आसानी से समझ में ही नही आ रहा था कि किधर को जायें और किधर को नही । मंदिर किधर को है और रास्ता किधर को । उपर जाने के बाद एक आटो वाले ने और घेर लिया कि अभी तो लाइन काफी दूर है और बस यहीं तक आ सकती हैं सेा आपको अगर वहां जाना है तो दस दस रूपये और देने पडेंगें । यहां लोगो के सिर मुंडे देखकर हमने सोचा कि सिर तो मुंडाना ही होगा और उसके आटो में बैठ गये । उसने चार पांच सौ मीटर ले जाकर छोड दिया कि अब यहां से पैदल जाओ । यहां रास्ते में लोगो को लाइन में लगा देखकर हम भी लग गये । एक दो श्रद्धालुओ से बात होने लगी कि कितनी देर में नम्बर आ जायेगा तो उन्होने बताया कि आप 300 रू के टिकट वाली लाइन में लगे हैं और यहां तो करीब तीन से चार घंटे में नम्बर आ जायेगा तो फिर बिना पैसे वाली लाइन कहां है ? उसने हाथ के इशारे से एक लाइन दिखायी देा जो ऐसी दिख रही थी कि जहां तक दिख रही थी वहां तक आदमी ही आदमी थे और वो भी ज्यादातर बैठे थे हमने तो उस हालत को देखकर इसी लाइन में लगा रहना ठीक समझा पर मा0 जी को लालाजी अलग को ले गये और थोडी देर बाद लालाजी और मा0 अपने अपने परिवार के साथ बिना पैसे वाली लाइन में चले गये । हम अपनी उसी लाइन में लगे रहे । एक घंटे बाद पीछे को देखा तो लालाजी और मा0 जी हमारे वाली लाइन में ही पीछे लगे हुऐ थे । क्यों ? वो थोडा नजदीक से देख आये थे हालात खैर लाइन में लगकर भी टिकट मिल जाता है । मंदिर परिसर से पहले इधर उधर और कुछ पुलो को पार करने के बाद एक जगह टिकट की सुविधा मिली जहां से सबने टिकट ले लिये ।
इसके बाद हमें ले जाकर एक हाल में छोड दिया गया । ये एक था पर ऐसे कई हाल थे जो जेल की बैरक की तरह थे जहां आपकी बैरक भरने पर पीछे से गेट बंद कर दिया जाता था अब आपके हाल में खचाखच भीड है और वो दोनो ओर से बंद है जिस क्रम में हाल बंद होंगे उसी क्रम में खुलेंगे यानि की श्रद्धालु उसी क्रम से छोडे जायेंगें । यहां नम्बर आने के बाद भी इतनी धक्का मुक्की थी कि पूछो मत । गर्मी के मारे जान निकल रही थी और खडे खडे पैर दुख गये थे । बुरा हाल था । एक और टिकट था शायद पांच सौ का या उससे भी उपर पर वो हमने नही लिया था हम तो तीन सौ के टिकट को भी बहुत सुपर मान रहे थे आज तक किसी पिक्चर का भी नही लिया था । सो साढे छह घंटे लाइन में लगने के बाद हम मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे । भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किये और बाहर मंदिर परिसर में आ गये । अब कुछ सुकून मिला । अपने बाकी साथियो के इंतजार में काफी बडे परिसर में हम एक जगह पर बैठ गये ।जब तक आप दर्शन करके मंदिर परिसर से बाहर नही आ जाते तब तक तो आपको ये भी नही पता चलता कि मंदिर किस दिशा में को और कैसा दिखता है क्योंकि लाइने जो लगती हैं वो शेड से ढकी है फिर उसके बाद हाल आ जाते हैं और फिर सीधे मंदिर में । दर्शनो के बाद ही पूरा मंदिर परिसर देखने को मिलता है जब सब आये तो एक साथ वापस चले । अंधेरा हो चुका था और हमने कुछ और देखने की नही सूझ रही थी सो सबसे पहले नीचे जाने के लिये गाडी ढूंढी और फिर होटल पहुंचे । रात काफी हो गयी थी और सब थक भी गये थे । होटल में जाने से पहले सामने एक रैस्टोरेंट में खाना खाया और जाकर सो गये
तिरूपति बालाजी कैसे पहुंचे ?तिरूपति दुनिया भर में हवाई मार्ग से जुडा हुआ है यहां तिरूपति का अपना हवाई अडडा भी है लेकिन उस पर उडान कम हैं । हैदराबाद के निकटतम हवाई अडडे के लिये आपको दुनिया के हर हिस्से से फलाइट मिल जायेगी । हैदराबाद से तिरूपति जाने के लिये हजारो रास्ते हैं । रेलवे के मामल में तिरूपति पहुंचना ज्यादा आसान है । यदि सीधे तिरूपति के लिये ट्रेन न मिले तो दस किलोमीटर दूर रेनीगुंटा स्टेशन के लिये भी ट्राई कर सकते हैं ।
तिरूपति जी का महात्मय और कथा अगले भाग में
तिरुपति बाला जी
ReplyDeleteसादर नमन |
हे सबसे धनाढ्य देव आशीष दें-
Tirupati Balaji Bhagwaan ki jai
ReplyDeleteमेरे भाई सुविधा के हिसाब से माता वैष्णोदेवी से अच्छा तीर्थ कोई नहीं हैं. वंहा कोई वी आई पी नहीं, कोई टिकट या पैसा नहीं. फिर भी क्या करे मज़बूरी हैं, बालाजी के दर्शन तो करने ही हैं, भगवान के यंहा भी पैसे वाले की ही पूछ हैं...जय हो बालाजी भगवान....
ReplyDeleteगुप्ता साहब मै आपकी बात से बिलकुल सहमत हूँ !
Deleteप्रवीण जी आपने वहां जाने के बाद सही तरीके इसकी पूछताछ करो जो ₹300 वाली लाइन में उससे भी पहले परिवार का दर्शन हो जाता है और रही बात रहने कि वहां पर रूम ₹50 में मिलता है जिसमें 6 आदमी रह सकते और कितने दिन वहां रहोगे आपको खाने के लिए ₹1 भी खर्च नहीं आएगा और तुम यह सोचते होंगे कि 300 से पहले दर्शन कैसे होता है तो पैदल वाली steps 5103 जाने के बाद बाद आपको 1 घंटे तक दर्शन हो जाता है
Deletewe make all most all the good places crowded,may be due to our great population of 125 crores.
ReplyDelete125 crore is blessing or . Tirupati Trust has own system, want to save time please donate. Very good descripton and nice fotos. Thanks
ReplyDeleteरोचक है पूर्व-परिचय।
ReplyDeleteतिरुपति बाला जी की जय जय कार....बेहद रोचक यात्रा वृत्तांत की प्रस्तावना ...
ReplyDeleteकई घन्टे लाईन में लगने पर यहाँ नम्बर आता है।
ReplyDeletekha bat ha manu jee
ReplyDeleteहम तो फ़िलहाल यहीं से जयकारा बुलाये दे रहे हैं।
ReplyDeleteमंदिरों ,ईसाईयों ,मुसलामानों ,धर्मों ....यहूदियों ..स्थानों ...आदि ...सबको शुद्ध करो बिंदी नहीं लगाईं है आपने ...बिड़ला लिखें बिडला नहीं ....मंदिर ऊपर पहाड़ी पर है ......उपर न लिखें ...
ReplyDeleteतिरु पति तिरुमाला देवस्थानम विवरण बढ़िया मुहैया करवाया है .बधाई दर्शन की कौन से किए जनरल या वी आई पी दर्शन ?
आपकी यात्रा वर्णन पढ कर अपनी यात्रा की याद आ गई । हैं तो सबसे धनवान देव, कहते हैं पद्मावती (लक्ष्मी)
ReplyDeleteजी से लिये कर्ज को चुकाना है वेंकटेश जी को तभी इतना चढावा चढाने का रिवाज़ है । हम तो खैर दर्सन किये जितना चढाना था चढाये और प्रसाद जरूर लिया वह बहुत बढिया होता है ।
बालाजी को नमन
ReplyDeleteबहुत बड़ी इच्छा है तिरुपति जाने की...
ReplyDeleteलेकिन आपके यात्रा वृतांत ने तो डरा दिया..
उमेश जी नमस्ते इसमें डरने की कोई बात नहीं है इन्होंने बहुत सी गलतियां कर दी है पहली गलती तो उन्होंने ₹300 के रूम लेकर नीचे सामान रखा और दर्शन होने के बाद नीचे भागने की जल्दबाजी की जैसे वहां पहुंचोगे सीधा ऊपर जाओ रूम करो और आराम से पर डे ₹50 से आदमी के लिए खाना-पीना के कोई पैसे नहीं लगते आधी बात आप अगर चाहे तो पैदल ऊपर जा सकते हो जैसे पौधे पहुंच जाओगे वहां पर 1 घंटे में दर्शन हो जाता है ज्यादा जानकारी के लिए आप मुझे फोन कर सकते हो
DeleteThanks sir, mol. No. ?
DeleteBahut achha likha hai aapne
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